० संवाददाता द्वारा ०
इंद्रजीत बसु पेशे से एक पुलिस कर्मी होकर सरकारी सेवा के जरिये लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदार का निर्वाह कर रहे हैं, लेकिन इस पेशे के बीच विभिन्न बाधाओं के बावजूद वह नियमित रूप से अपने गीत संगीत का रिहर्सल करते रहते हैं।
कोलकाता में सांस्कृतिक कला से ताल्लुक रखनेवाले परिवार में जन्मे, इंद्रजीत को संस्कृति से गहरा प्यार है। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत और स्कूल के दिनों से बांसुरी बजाकर इससे जुड़ी सांस्कृतिक कला को गहराई से जानना और इसे सीखना शुरू कर दिये थे। सभी प्रकार के संगीत को सुनना उनके लिए शुरुआती वर्षों में लंबी सांस लेने जैसा था। इस बीच उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को संगीत की सबसे आकर्षक शैली के रूप में महसूस किया। उन्होंने अनुप्रस्थ बांसुरी की सुरीली धुन छेड़ कर खुद को अभिव्यक्त करने का माध्यम बनाया ।
कलकत्ता विश्वविद्यालय से स्नातक पूरी करने के बाद भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनकी औपचारिक ट्यूशन शुरू हुई। रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय में स्वर्गीय पंडित निखिलेश रॉय के एक शिष्य के रूप में उन्होंने संस्कृत कला में शिक्षा आरंभ किया था। पश्चिम बंगाल के कई स्थानों पर पिछले कुछ वर्षों में कई कार्यक्रमों में एक कलाकार के रूप में इंद्रजीत ने अपनी बंसुरी के भित्तिचित्रों को प्रस्तुत किया है, जिसमें उत्तरपाड़ा संगीतचक्र वार्षिक सम्मेलन, सॉल्टलेक संगीत समारोह, दक्षिणी संगीत समारोह, चौधरी हाउस संगीत सम्मेलन, बंगीय संगीत परिषद संगीत समारोह और अन्य शामिल हैं। इनमें कई कार्यक्रमों में अलेके संगीत प्रस्तुत करने के आलावा इंद्रजीत ने जुगलबंदी के रूप में भी विभिन्न भारतीय शास्त्रीय संगीतकारों के साथ सहयोग करने के लिए उनका एक अलग स्थान है।
इंद्रजीत बसु हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को दर्शकों के बीच ज्यादा से ज्यादा पेश करने को हमेशा उत्सुक रहते हैं। इसके अलावा दोनों तरह के कलाकारों के वाद्य / गायन के लिए शास्त्रीय संगीत के कार्यक्रम में वह शामिल होते हैं। इसके अलावा वह खुद भी काफी शास्त्रीय संगीत सम्मेलनों का आयोजन कर चुके हैं, जिनमें से दीर्घ शास्त्रीय संगीत समारोह, उनकी मां के नाम पर स्वर्गीय मालती बासु मेमोरियल संगीत सम्मेलन -2019 इसमें प्रमुख है।
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