0 सोनाली सेन 0
कुरीति का विसर्जन हो,रीतियां आह्वनित हो,
दौर ये गम का छट जाये, दीप अब दिव्यमानित हो,
बुराई दहन होली मे, करे रंग यूं लगायेगे,
बाट खुशियाँ सभी को, इस तरह होली मनायेगे।।
प्रेम प्रह्लाद की भांति,द्वेश मे अंत नही होता,
होलिका स्वयं जल जाये सत्य का अंत नही होता,
सजाये रंगो से जीवन, भरे जीवन मे रंगो को,
तिमिर जीवन से अपने सब, आज होली मे जलायेगें ।।
महामारी की आहुति, खतम सब कष्ट हो जाये,
काल ये नष्ट करने को, भावमय राम आ जाएं ,
जन-जन अपने मन मे ,ओज का दीपक जलायेगें,
बाट खुशियाँ सभी को ,इस तरह होली मनायेगें ।।
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