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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संस्कृत टेक्स्ट लेखन में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की अहम भूमिका होगी


० योगेश भट्ट ० 

नयी दिल्ली  राष्ट्रीय तयशिक्षा नीति -2020 के आलोक में संस्कृत तथा इस शास्त्र में छुपे ज्ञान परम्परा को उजागर करने के लिए केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली द्वारा एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया । 10 वीं तथा 12वीं स्तर पर पाठ लेखन में भारतीय ज्ञान परंपरा को उजागर करने के लिए आयोजित यह कार्यशाला चली । भारतीयता के प्रसार प्रचार के लिए कटिबद्ध विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के 10वीं तथा 12वीं के पाठ निर्माण के लिए लिए यह कार्यशाला में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, 
दिल्ली द्वारा बतौर इन्टेक्यूअल पार्टनर के रुप में देश में अवस्थित अपने विश्वविद्यालय के विविध परिसरों के 24 विषय विशेषज्ञों ने भाग लिया । इसमें विद्या भारती तथा संस्कृत भारती के भी लगभग 35 विद्वानों/विदुषियों ने भी भाग लिया । श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली ने इस आयोजन के होस्ट पार्टनर के रुप में भौतिक संसाधनों की व्यवस्था के साथ अपना बौद्धिक योगदान भी दिया उद्घाटन सत्र में केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने बीज भाषण देते हुए कहा कि संस्कृत के बिना भारतीय ज्ञान परंपरा की चर्चा अधूरी है । अत: यह मेरा पूरा विश्वास है कि इस कार्यशाला के चिंतन से जो पाठ लेखन होगा ,उसका दूरगामी परिणाम होगा । जाने माने शिक्षाविद् चांदकिरण सलूजा ने कहा की यह कार्यशाला पाठ निर्माण की दृष्टि से काफी नयेपन लिए लगता है। विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के संगठन मंत्री रघुनन्दन महोदय ने विद्या भारती के लक्ष्य को लेकर पाठ लेखन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला ।

रिसोर्स पर्सन के रुप में प्रो पी एन शास्त्री,पूर्व कुलपति , केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली, चांद किरण सलूजा,दिल्ली, आचार्य जनार्दन हेगडे, बंगलुरू, आचार्य दिनेश कामत , दिल्ली प्रो वाई एस रमेश,जयपुर तथा एच् आर् विश्वास, बंगलुरू ने पाठ लेखन की भाषा तथा कंनटेंट को लेकर मार्ग प्रशस्त किया । आचार्य हेगडे ने भाषा के महत्त्व पर भी प्रकाश डाला । राष्ट्रीय शिक्षा- 2020के भाषा को लेकर भारत सरकार के प्रतिनिधि पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा कि इस बार की शिक्षा नीति में भाषा को समुचित स्थान मिला है और इसमें अनुवाद की दृष्टि से अनूदित संस्कृत की महत्त्व की भूमिका होगी ।

समापन सत्र में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो मुरलीमनोहर पाठक ने इस कार्यशाला को लेकर अपना तोष जताते साफ़ किया कि पाठ्यक्रम में संस्कृत में विज्ञान, ज्योतिष तथा खगोलशास्त्र आदि को भी जोड़ा जाना चाहिए और आचार्य दिनेश कामत ने कहा कि संस्कृत के लिए आज बहुत सारी संभावनाएं दिख रही हैं ।प्रो वाई एस रमेश ने रिसोर्स पर्सन के साथ साथ प्रतिभागियों के विविध बौद्धिक दलों के चर्चा के माध्यम से पाठ लेखन के उद्देश्यों तथा परामर्शों को भी प्रकाश में लाने का प्रयास किया । साथ ही साथ प्रो रमेश जी ने कार्यशाला का रिपोर्ट प्रस्तुत की ।

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली की तरफ से इस कार्यशाला के संयोजक प्रो बिहारी लाल शर्मा ने भी अपने महत्त्वपूर्ण विचार रखे।इनके अलावा आचार्य रामसलाही द्विवेदी,प्रो अमिता पाण्डेय तथा प्रो आर पी पाठक ने भी अपने विचार रखें । उद्घाटन तथा समापन सत्रों संचालन क्रमशः डा देशबन्धु (दिल्ली)तथा पवन व्यास (जयपुर) ने किया । केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के पीआरओ तथा इस कार्यशाला के अपने विश्वविद्यालय के तरफ से संयोजक डा अजय कुमार मिश्रा ने उद्घाटन तथा समापन सत्रों के लिए धन्यवाद ज्ञापन किया । वेद विभाग के आचार्य डा रमाकांत पाण्डेय ने सस्वर मंगला चरण किया
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