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उत्कर्ष दिवस पर ' आजकल का संस्कृत साहित्य ' ग्रंथ का विमोचन

० योगेश भट्ट ० 

नयी दिल्ली - केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के संयोजकत्व में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय , दिल्ली तथा राष्ट्रिय संस्कृत विश्वविद्यालय के द्वारा डा अंबेडकर अन्तर्राष्ट्रीय सेंटर,, दिल्ली में मनाये गये  समापन के दिन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ,दिल्ली के कुलपति प्रो श्री निवास वरखेडी़ ने राष्ट्रपति पुरस्कार-महर्षि बादरायण व्यास सम्मान (2005, संस्कृत) से सम्मानित डा अजय कुमार मिश्रा की पुस्तक ' आजकल का संस्कृत साहित्य ' का विमोचन किया और उन्हें बधाई दी ।

इस किताब में समकालीन संस्कृत उपन्यासों, नाटकों तथा कविताओं के साथ साथ संस्कृत तथा स्त्री विमर्श की धारदार समीक्षा की गयी है। गौ़रतलब है कि भारत के अमृत महोत्सव के अवसर पाठक को इस किताब के ज़रिए स्वतंत्रता संग्राम में संस्कृत पत्र पत्रिकाओं के योगदानों की सामग्री भी पढ़ने को मिलेंगी ।साथ ही साथ स्वतंत्रता संग्राम के ' स्वर्ण जयंती ' मनाने के दौरान जो भी महत्वपूर्ण संस्कृत लेखन प्रकाश में आये हैं उनका भी आकलन इसमें किया गया है । लेखक ने संस्कृत भाषा तथा साहित्य को लेकर जो पाश्चात्य विद्वानों द्वारा एक साज़िश के तहत क्लोनाइज्ड ( औपनिवेशिक) मिथक का ताना बाना बुना गया है । उसका भी इसमें बडा़ ही माकू़ल जवाब दिया गया है ।

इस प्रकार आज की संस्कृत भाषा तथा साहित्य की जीवंतता को इसमें स्पष्ट किया गया है।इससे शैल्डन पौलक जैसे अनेक विदेशी विद्वानों की उस बात का खंडन होता जिसमें उनलोगों ने उत्तर औपनिवेशिक साहित्यिक आक्रमण के जरिये यह मिथक फैलाने का प्रयास किया गया है कि ' संस्कृत एक मृत भाषा ' है । अमेरिका से छपने वाली नामचीन पत्र पत्रिका -' ग्रांटा 'तथा 'न्यूयॉर्क ' ने भारत के' स्वर्ण जयंती ' के अवसर पर छपे अपने विशेषांक में यह मिथक फैलाने का प्रयास किया है कि भारत की आज़ादी के बाद हिन्दुस्तानी साहित्य में खा़स कर हिंदी में राष्ट्रवादी रचनाधर्मिता का सर्वथा अभाव है उसका भी सर्वथा खंडन होता है।
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