भोपाल -लोकप्रिय कवि हेमंत की जयंती का आयोजन अंतर्राष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच द्वारा "हेमंत जयंती" के अवसर पर "हेमंत स्मरण" का विशिष्ट आयोजन सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज (रायपुर/ छत्तीसगढ़) तथा मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार संजीव निगम (मुम्बई) एवं विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ संजीव कुमार (दिल्ली) थे।
कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र का संचालन मुजफ्फर सिद्दीकी द्वारा किया गयावंदना रानी दयाल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम प्रारंभ करते हुए वरिष्ठ लेखिका ,संस्था की संस्थापिका संतोष श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए हेमंत से संबंधित स्मृतियां साझा कीं तथा दिव्यांग बच्चों के लिए हेमंत के सेवा भाव का जिक्र किया । प्रमिला वर्मा ने हेमंत की स्मृतियों को ताज़ा करते हुए हेमंत के कविता संग्रह मेरे रहते तथा हेमंत द्वारा बनाए गये रेखाचित्रों पर अपनी बात रखी।
रीता दास राम,अर्चना पाण्डेय,मधुलिका श्रीवास्तव,अंजना श्रीवास्तव,सरस दरबारी तथा डॉ क्षमा पाण्डेय ने हेमंत की कविताओं का भावपूर्ण पाठ किया। कार्यक्रम का दूसरा सत्र डॉ मनोरमा जी द्वारा हेमंत की चुनिंदा कविताओं पर समीक्षा से प्रारंभ हुआ। विशिष्ट अतिथि डाॅ संजीव कुमार जी ने अपने वक्तव्य में हेमंत की कुछ कविताओं आ पाठ करते हुए कहा कि आज मंदिर- मस्जिद के मुद्दों पर विवाद हो रहा है हेमंत ने अपने रहते धर्म को प्रेम में देखा। हेमंत का आकस्मिक निधन एक भरी पूरी संभावना से साहित्य जगत के लिए अपूरित क्षति है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजीव निगम जी ने अपने वक्तव्य में हेमंत की दुर्घटना ग्रसित मृत्यु से संबंधित आश्चर्यजनक घटना साझा की जिसमें मृत्यु के ठीक समय पर हेमंत की प्रिय घड़ी का अलार्म बज उठना अनहोनी का संकेत था। हेमंत की छोटी आयु में बड़ी उपलब्धि की बात कहते हुए संतोष जी के दृढ़ संकल्प तथा साहस की प्रशंसा की। निहाल चंद शिवहरे,जया आर्या, गोकुल सोनी,शैफालिका श्रीवास्तव तथा सविता सयाल ने हेमंत के प्रति भावपूर्ण उद्गार व्यक्त किए।
गिरीश पंकज जी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में हेमंत की कविताओं पर बात करते हुए कहा कि हेमन्त की रचनात्मकता में परिपक्वता आश्चर्यचकित करती है। अल्पायु सुकांत भट्टाचार्य और पाश को याद करते हुए हेमंत के असमय जाने पर खेद प्रकट किया और कहा इन कवियों के साथ हेमंत की कविताएं हमेशा याद रखी जाएंगी। हेमंत का अंत भले हो गया लेकिन उनकी रचनाओं का वसंत सदैव बना रहेगा। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र का संचालन रूपेंद्र राज तिवारी ने तथा आभार व्यक्त किया जया केतकी ने क। भारत के विभिन्न शहरों एवं देश विदेश से 70 लोगों की उपस्थिति रही।
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